1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

वे बहादुर अंगे्रज उकताने लगे हों तो कोई आश्चर्य नहीं। अतः फिर इस धार्मिक और उदार कार्य में जो गंभीरता थी उसे थोड़ा कम करके मनोरंजन करने के लिए कुछ नवीनता मिलाई गई। सिर्फ उठाया और पेड़ पर टांग दिया, इस भोंडी पद्वति को अब थोड़ा कलात्मक बनाया गया। ‘‘अब नेटिवों को पहले हाथी पर बैठाया जाता, फिर हाथी को ऊंचे पेड़ की शाखा तक ले जाया जाता और उसके ऊपर बैठे नेटिव की गरदन शाख से बंाधने के बाद हाथी को हटा लिया जाता।


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वे बहादुर अंगे्रज उकताने लगे हों तो कोई आश्चर्य नहीं। अतः फिर इस धार्मिक और उदार कार्य में जो गंभीरता थी उसे थोड़ा कम करके मनोरंजन करने के लिए कुछ नवीनता मिलाई गई। सिर्फ उठाया और पेड़ पर टांग दिया, इस भोंडी पद्वति को अब थोड़ा कलात्मक बनाया गया। ‘‘अब नेटिवों को पहले हाथी पर बैठाया जाता, फिर हाथी को ऊंचे पेड़ की शाखा तक ले जाया जाता और उसके ऊपर बैठे नेटिव की गरदन शाख से बंाधने के बाद हाथी को हटा लिया जाता।


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