हाथी निकल जाने पर उन अगणित छटपटाहट मरते लोगों के ऊंटपटांग लटकते शव दिखाई देते। पर इस रतह वहां से गुजरते अंगे्रजों को एक मनहूस साम्यता दिखाई देती थी, इसलिए नेटिव को पेड़ पर सीधे लटकाकर फांसी देने की बजाय अलग-अलग आकृति बनाकर टांगा जाता। कोई अंगे्रजी आठ (8) जैसा बांधा जाता तो कोई नौ (9) जैसा।’’
परंतु इस तरह प्रयास करने के बाद भी काले लोग हजारों-लाखों में जीवित-के-जीवित। अब इतनों को फांसी चढ़ाने की बात
हाथी निकल जाने पर उन अगणित छटपटाहट मरते लोगों के ऊंटपटांग लटकते शव दिखाई देते। पर इस रतह वहां से गुजरते अंगे्रजों को एक मनहूस साम्यता दिखाई देती थी, इसलिए नेटिव को पेड़ पर सीधे लटकाकर फांसी देने की बजाय अलग-अलग आकृति बनाकर टांगा जाता। कोई अंगे्रजी आठ (8) जैसा बांधा जाता तो कोई नौ (9) जैसा।’’
परंतु इस तरह प्रयास करने के बाद भी काले लोग हजारों-लाखों में जीवित-के-जीवित। अब इतनों को फांसी चढ़ाने की बात