के प्रति राजनिष्ठ रहेंगे और फिरंगियों से लडें़गे-ऐसी शपथ ली, केवल उन्हें ही प्राणदान मिला। 7 जून के प्रातः क्रांतिकारियों ने इलाहाबाद का खजाना कब्जे में लिया। इस खजाने में कोई 30 लाख रूपए थे। फिर दोपहर के समय एक बड़ा सा हरा झंडा ले जाकर शहर की मुख्य कोतवाली पर लगाया गया और उसे सारे नागरिकों ने सलाम किा। जिस दिन शहर और किला इस विद्रोह की ज्वाला में सुलग रहा था उसी दिन सारा इलाहाबाद प्रांत मानों एक व्यक्ति-सा
के प्रति राजनिष्ठ रहेंगे और फिरंगियों से लडें़गे-ऐसी शपथ ली, केवल उन्हें ही प्राणदान मिला। 7 जून के प्रातः क्रांतिकारियों ने इलाहाबाद का खजाना कब्जे में लिया। इस खजाने में कोई 30 लाख रूपए थे। फिर दोपहर के समय एक बड़ा सा हरा झंडा ले जाकर शहर की मुख्य कोतवाली पर लगाया गया और उसे सारे नागरिकों ने सलाम किा। जिस दिन शहर और किला इस विद्रोह की ज्वाला में सुलग रहा था उसी दिन सारा इलाहाबाद प्रांत मानों एक व्यक्ति-सा