1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

उठ खड़ा हुआ। इधर कहीं मानो फिरंगियों का राज था ही नहीं, एसेा लगने लगा। हर गावं ने हरा या जरी का झंडा फहराया और आसपास के गोरे अधिकारियों को भगा दिया, अधिकतर को मार ही डाला जिससे वहां फिरंगियों की गुलामी जड़-मूल से उखाड़ फेंकने जैसी स्थिति हो गई। अरे रे, सौ वर्ष तक जिसके जड़-मूल गहरे बैठाने के लिए प्रयास किए गए उस गुलामी की जड़ें इतनी उथली होती हैं! वास्तव में केवल तलवार से जोती हुई भूमि में कुछ भी पैदा नहीं


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उठ खड़ा हुआ। इधर कहीं मानो फिरंगियों का राज था ही नहीं, एसेा लगने लगा। हर गावं ने हरा या जरी का झंडा फहराया और आसपास के गोरे अधिकारियों को भगा दिया, अधिकतर को मार ही डाला जिससे वहां फिरंगियों की गुलामी जड़-मूल से उखाड़ फेंकने जैसी स्थिति हो गई। अरे रे, सौ वर्ष तक जिसके जड़-मूल गहरे बैठाने के लिए प्रयास किए गए उस गुलामी की जड़ें इतनी उथली होती हैं! वास्तव में केवल तलवार से जोती हुई भूमि में कुछ भी पैदा नहीं


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