1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

नियत समय पर आज तक के अपमान का भयानक प्रतिशोध लेना प्रांरभ किया। जहां-तहां स्वराज्य की जय-जयकार होती, गुलामी के मुंह पर गली-कूंचों में बच्चे भी थूकने लगे। सचमुच


1857 का स्वातंत्र्य समर - 168

लड़कों ने थूका। क्यांेकि बारह-चैदह वर्ष के बच्चों ने स्वराज्य के हरे जरीदार झंडे लगाए और ताशे बजाते हुए उन झंडों को उठाए उन्होंने जुलूस भी निकाले। ऐसे ही एक जुलूस को पकड़कर अंगे्रजों ने उसमें सम्मिलित तरूणों


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नियत समय पर आज तक के अपमान का भयानक प्रतिशोध लेना प्रांरभ किया। जहां-तहां स्वराज्य की जय-जयकार होती, गुलामी के मुंह पर गली-कूंचों में बच्चे भी थूकने लगे। सचमुच


1857 का स्वातंत्र्य समर - 168

लड़कों ने थूका। क्यांेकि बारह-चैदह वर्ष के बच्चों ने स्वराज्य के हरे जरीदार झंडे लगाए और ताशे बजाते हुए उन झंडों को उठाए उन्होंने जुलूस भी निकाले। ऐसे ही एक जुलूस को पकड़कर अंगे्रजों ने उसमें सम्मिलित तरूणों


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