1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

स्वराज्य-संपन्न हो जाए-इसके लिए प्रयाग के पंडे और मुल्ला अपना पवित्र आशीर्वाद उस क्रांति के माथे पर बरसाने लगे।

हिंदुस्थान के इतिहास में इतनी उत्क्षोभक, विद्युत वेगी, भयानक एवं सर्वत्र व्याप्त राज्य क्रांति दूसरी दिखना बहुत कठिन है। लोक-शक्तियां जिसमें भड़भड़ाकर जाग उठीं और अपने देश की स्वतंत्रता के लिए एकाएक गर्जना करते मेघों की तरह रक्त की मूसलधार वर्षा करने लगीं। यह सन् 1857 जैसी प्रचंड राज्य क्रांति


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स्वराज्य-संपन्न हो जाए-इसके लिए प्रयाग के पंडे और मुल्ला अपना पवित्र आशीर्वाद उस क्रांति के माथे पर बरसाने लगे।

हिंदुस्थान के इतिहास में इतनी उत्क्षोभक, विद्युत वेगी, भयानक एवं सर्वत्र व्याप्त राज्य क्रांति दूसरी दिखना बहुत कठिन है। लोक-शक्तियां जिसमें भड़भड़ाकर जाग उठीं और अपने देश की स्वतंत्रता के लिए एकाएक गर्जना करते मेघों की तरह रक्त की मूसलधार वर्षा करने लगीं। यह सन् 1857 जैसी प्रचंड राज्य क्रांति


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