जानकारी मिलती है वह यह कि यह जुलाहों का प्रमुख धर्मगुरू था। क्रांति के पहले उसने विद्यालयों में अध्यापन कार्य किया था। इसकी धर्मशील पवित्रता से इसपर लोगों की श्रद्धा हो गई थी। विद्रोह के बाद जनता द्वारा इलाहाबाद स्वतंत्र करते ही कुछ दिनों में चैबीस परगना के जमींदारों ने इस मौलवी को इलाहाबाद में लाकर प्रांत का मुख्य अधिकारी नियुक्त किया और बड़े समारोह के साथ दिल्ली के बादशाह के प्रतिनिधि के रूप् में
जानकारी मिलती है वह यह कि यह जुलाहों का प्रमुख धर्मगुरू था। क्रांति के पहले उसने विद्यालयों में अध्यापन कार्य किया था। इसकी धर्मशील पवित्रता से इसपर लोगों की श्रद्धा हो गई थी। विद्रोह के बाद जनता द्वारा इलाहाबाद स्वतंत्र करते ही कुछ दिनों में चैबीस परगना के जमींदारों ने इस मौलवी को इलाहाबाद में लाकर प्रांत का मुख्य अधिकारी नियुक्त किया और बड़े समारोह के साथ दिल्ली के बादशाह के प्रतिनिधि के रूप् में