1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

उसे नाम की डौंड़ी पीट दी गई। इस मौलवी ने अपना मुख्यालय खुसरो बाग में बनाया। इस बाग के चारों ओर एक मजबूत दीवार थी। फिर उसने सारे प्रांत के विद्रोहियों को संगठित करना प्रारंभ किया। उसने जल्दी ही सारे सरकारी काम और षड्यंत्र व्यवस्था से प्रारंभ करवाएं। ‘‘मैं दिल्ली के बादशाह का सूबेदार हूं’’, केवल वह कहता ही नहीं रहा, ऐसा इलाहाबाद के सारे समाचार और घटनाओं की सरकारी रिपार्ट अंत तक दिल्ली के बादशाह को भेजता भी रहा।


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उसे नाम की डौंड़ी पीट दी गई। इस मौलवी ने अपना मुख्यालय खुसरो बाग में बनाया। इस बाग के चारों ओर एक मजबूत दीवार थी। फिर उसने सारे प्रांत के विद्रोहियों को संगठित करना प्रारंभ किया। उसने जल्दी ही सारे सरकारी काम और षड्यंत्र व्यवस्था से प्रारंभ करवाएं। ‘‘मैं दिल्ली के बादशाह का सूबेदार हूं’’, केवल वह कहता ही नहीं रहा, ऐसा इलाहाबाद के सारे समाचार और घटनाओं की सरकारी रिपार्ट अंत तक दिल्ली के बादशाह को भेजता भी रहा।


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