तैयार नहीं थे। लोगों की इन अपूर्व निष्ठा के लिए उस समय के अंगे्रज अधिकारियों ने अपने पत्रों में भी बड़ा आश्चर्य व्यक्त किया है। एक गांव के संबंध में एक अधिकारी लिखता है-‘‘मजिस्टेªट ने किसानों में सुपरिचित एक क्रांतिकारी नेता का सिर काटकर उपस्थित करने पर एक हजार रूपए का पुरस्कार देने की घोषणा की। किंतु हम (गोरों) से भारतवासियों को इतना अधिक द्वेष था कि एक भी व्यक्ति ने उसे बंदी बनाने के लिए आगे आने तक की चेष्टा नहीं की।’’-चाल्र्स बाल,
तैयार नहीं थे। लोगों की इन अपूर्व निष्ठा के लिए उस समय के अंगे्रज अधिकारियों ने अपने पत्रों में भी बड़ा आश्चर्य व्यक्त किया है। एक गांव के संबंध में एक अधिकारी लिखता है-‘‘मजिस्टेªट ने किसानों में सुपरिचित एक क्रांतिकारी नेता का सिर काटकर उपस्थित करने पर एक हजार रूपए का पुरस्कार देने की घोषणा की। किंतु हम (गोरों) से भारतवासियों को इतना अधिक द्वेष था कि एक भी व्यक्ति ने उसे बंदी बनाने के लिए आगे आने तक की चेष्टा नहीं की।’’-चाल्र्स बाल,