1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

खंड 1। नेता पकड़कर देना ही नहीं, पैसा लेकर अंगे्रजों को माल बेचना तक बहुत बड़ा पाप माना जाता था। यदि किसी ने यह अपराध किया तो उसे समाज की ओर से भयानक दंड तत्काल दिया जाता। ‘‘कोई भी ऐसा व्यक्ति जो यूरोपियन के लिए कुछ भी करता था, उसे ये हत्यारे मार ही डालते थे।ं ं ं ं एक निर्धन पाव रोटीवाले ने हमारे लिए पाव रोटी भेज दी थी तो बाद में देखा गया कि उसके दोनों हाथ ही काट


1857 का स्वातंत्र्य समर - 171


लिये


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खंड 1। नेता पकड़कर देना ही नहीं, पैसा लेकर अंगे्रजों को माल बेचना तक बहुत बड़ा पाप माना जाता था। यदि किसी ने यह अपराध किया तो उसे समाज की ओर से भयानक दंड तत्काल दिया जाता। ‘‘कोई भी ऐसा व्यक्ति जो यूरोपियन के लिए कुछ भी करता था, उसे ये हत्यारे मार ही डालते थे।ं ं ं ं एक निर्धन पाव रोटीवाले ने हमारे लिए पाव रोटी भेज दी थी तो बाद में देखा गया कि उसके दोनों हाथ ही काट


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