मिलते थे। इस कारण जगह-जगह पड़े बीमार लोगों की कर्कश कराहें इतनी भयानक होती कि उन्हें सुनकर ही अंगे्रज महिलाएं चटपट मरने लगीं। वे दिन धूप के थे और जून माह में विद्रोह करके हम अंगे्रजों को अपने देश के सूर्यताप से मार डालंेगे, विद्रोहियों का यह जो दांव था, उसका अनुभव होने लगा। सिर पर गीला कपड़ा बार-बार रखने में ही सारे अंगे्रज निमग्न थे। उस पर अन्न न मिलना। अनाज का एक दाना भी कोई अंग्रेजों को बेचने के लिए
मिलते थे। इस कारण जगह-जगह पड़े बीमार लोगों की कर्कश कराहें इतनी भयानक होती कि उन्हें सुनकर ही अंगे्रज महिलाएं चटपट मरने लगीं। वे दिन धूप के थे और जून माह में विद्रोह करके हम अंगे्रजों को अपने देश के सूर्यताप से मार डालंेगे, विद्रोहियों का यह जो दांव था, उसका अनुभव होने लगा। सिर पर गीला कपड़ा बार-बार रखने में ही सारे अंगे्रज निमग्न थे। उस पर अन्न न मिलना। अनाज का एक दाना भी कोई अंग्रेजों को बेचने के लिए