1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

उस पूर्वग्रह-युक्त विशाल सामग्री में भी उन्हें ‘सिपाही विद्रोह’ के परदे के भीतर एक सुनियोजित स्वातंत्र्य समर के स्पष्ट दर्शन तथ्यों में से कैसा नया चित्र उभर आता है, इतिहास-लेखन के क्षेत्र में उसका यह अत्युत्तम उदाहरण है। इसीलिए सावरकर की पुस्तक दो-दो स्वातंत्र्य समरों (1814 व 1943) का प्रेरणा-स्त्रोत बन गई।

देवेन्द्र स्वरूप


ओ हुतात्माओं !

स्वतंत्रता संग्राम आरंभ हो एक बार

पिता से पुत्र को पहुंचे बार-बार


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उस पूर्वग्रह-युक्त विशाल सामग्री में भी उन्हें ‘सिपाही विद्रोह’ के परदे के भीतर एक सुनियोजित स्वातंत्र्य समर के स्पष्ट दर्शन तथ्यों में से कैसा नया चित्र उभर आता है, इतिहास-लेखन के क्षेत्र में उसका यह अत्युत्तम उदाहरण है। इसीलिए सावरकर की पुस्तक दो-दो स्वातंत्र्य समरों (1814 व 1943) का प्रेरणा-स्त्रोत बन गई।

देवेन्द्र स्वरूप


ओ हुतात्माओं !

स्वतंत्रता संग्राम आरंभ हो एक बार

पिता से पुत्र को पहुंचे बार-बार


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