1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

उन सभी की समीक्षा की। अंत में उन्हांेने सावरकर द्वारा प्रस्तुत चित्रण और नामकरण को ही तथ्यों की कसौटी पर सही ठहराया।

यह सावरकर की ऐतिहासिक दृष्टि की भारी विजय थी। सन् 1909 में प्रकाशित प्रथम गुप्त संस्करण की भूमिका में सावरकर ने लिखा था कि यद्यपि उन्हें इंडिया आॅफिस लाइबे्ररी व नेशनल म्यूजियम लाइब्रेरी में केवल ब्रिटिश सरकार के दस्तावेजों एवं ब्रिटिश लेखकों की पुस्तकों पर ही अवलंबित रहना पड़ा, किंतु


79 of 2102

उन सभी की समीक्षा की। अंत में उन्हांेने सावरकर द्वारा प्रस्तुत चित्रण और नामकरण को ही तथ्यों की कसौटी पर सही ठहराया।

यह सावरकर की ऐतिहासिक दृष्टि की भारी विजय थी। सन् 1909 में प्रकाशित प्रथम गुप्त संस्करण की भूमिका में सावरकर ने लिखा था कि यद्यपि उन्हें इंडिया आॅफिस लाइबे्ररी व नेशनल म्यूजियम लाइब्रेरी में केवल ब्रिटिश सरकार के दस्तावेजों एवं ब्रिटिश लेखकों की पुस्तकों पर ही अवलंबित रहना पड़ा, किंतु


79 of 2102