1857 का स्वातंत्र्य समर - 174
पर वह सुख के लिए नहीं-यह पवित्र कर्तव्य था, इसलिए किया गया, जनरल नील के सम्मान में यहां यह कहना होगा।’’
उपर्युक्त उद्धण में निष्पक्ष इतिहास और सच्चे परमेश्वर को (नील के परमेश्वर को नहीं) यदि किसी के द्वारा की गई आम हत्याएं किसी को यथार्थ और न्यायपूर्ण लगती हों तो वह अंगे्रजों द्वारा की गई हत्याएं न होकर विप्लवकारियों द्वार की गई हत्याएं हैं। स्वतंत्रता के लिए की गई हत्याएं क्षम्य हैं या नहीं,
1857 का स्वातंत्र्य समर - 174
पर वह सुख के लिए नहीं-यह पवित्र कर्तव्य था, इसलिए किया गया, जनरल नील के सम्मान में यहां यह कहना होगा।’’
उपर्युक्त उद्धण में निष्पक्ष इतिहास और सच्चे परमेश्वर को (नील के परमेश्वर को नहीं) यदि किसी के द्वारा की गई आम हत्याएं किसी को यथार्थ और न्यायपूर्ण लगती हों तो वह अंगे्रजों द्वारा की गई हत्याएं न होकर विप्लवकारियों द्वार की गई हत्याएं हैं। स्वतंत्रता के लिए की गई हत्याएं क्षम्य हैं या नहीं,