से अत्यंत वेग से बह रहे क्रांति भागीरथी के रक्त-प्रवाह को उŸारी हिंदुस्थान के विस्तृत मैदान पर धमा-चैकड़ी करते छोड़कर अब कुछ देर हमें उस क्रांति भागीरथी के मुख्य óोत हरिद्वार में क्या चल रहा है-उसे देखना चाहिए। श्रीमंत नाना साहब के बाड़े में मेरठ के विस्फोट के समय जितने कार्यकर्ता इकट्ठे हुए थे उतने उस समय लखनऊ के राजमंदिर में, बरेली प्रांत में या स्वयं दिल्ली के दीवान-ए-खास में भी मिलने कठिन थे। इस ब्रह्यवर्त
से अत्यंत वेग से बह रहे क्रांति भागीरथी के रक्त-प्रवाह को उŸारी हिंदुस्थान के विस्तृत मैदान पर धमा-चैकड़ी करते छोड़कर अब कुछ देर हमें उस क्रांति भागीरथी के मुख्य óोत हरिद्वार में क्या चल रहा है-उसे देखना चाहिए। श्रीमंत नाना साहब के बाड़े में मेरठ के विस्फोट के समय जितने कार्यकर्ता इकट्ठे हुए थे उतने उस समय लखनऊ के राजमंदिर में, बरेली प्रांत में या स्वयं दिल्ली के दीवान-ए-खास में भी मिलने कठिन थे। इस ब्रह्यवर्त