परंतु उसका ‘वार’ नहीं मरा-वह कभी मरनेवाला भी नहीं है। तात्या टोपे जैसी तलवार, जिसे काल द्वारा जीर्ण और शत्रु द्वारा विदीर्ण की हुई म्यान मंे से स्वेच्छा मात्र से निकाला जा सकता है, उस हिंद-भू की अक्षय कोख को नमस्कार करें।
हिंदभूमि की इसी आदरणीय कोख से सन् 1814 के आसपास वीरवर तात्या टोपे का जन्म हुआ। उनके पिता का नाम पांडुरंग भट था। पांडुरंग भट को कुल आठ पुत्र थे और दूसरे पुत्र का नाम रघुनाथ था। यही
परंतु उसका ‘वार’ नहीं मरा-वह कभी मरनेवाला भी नहीं है। तात्या टोपे जैसी तलवार, जिसे काल द्वारा जीर्ण और शत्रु द्वारा विदीर्ण की हुई म्यान मंे से स्वेच्छा मात्र से निकाला जा सकता है, उस हिंद-भू की अक्षय कोख को नमस्कार करें।
हिंदभूमि की इसी आदरणीय कोख से सन् 1814 के आसपास वीरवर तात्या टोपे का जन्म हुआ। उनके पिता का नाम पांडुरंग भट था। पांडुरंग भट को कुल आठ पुत्र थे और दूसरे पुत्र का नाम रघुनाथ था। यही