रघुनाथ हिंदुस्थान के इतिहास के तारामंडल में ‘तात्या’ नाम से चमकता स्वतंत्रता का दिव्य तारा था।
पांडुरंग राव टोपे देशस्थ ब्राह्यण थे और अंतिम बाजीराव के पास ब्रह्यवर्त में वे दानाध्यक्ष के पद पर थे। उस ब्रह्यवर्त को एक समय कितना अलभ्य लाभ हुआ था! उसके आंगन में नाना साहब, झाँसी की छबीली, तात्या टोपे आदि की समकालीन स्नेह लीला हुई थी। बचपन से ही श्रीमंत नाना की तात्या से बड़ी प्रीति थी। जिस महान् कार्य
रघुनाथ हिंदुस्थान के इतिहास के तारामंडल में ‘तात्या’ नाम से चमकता स्वतंत्रता का दिव्य तारा था।
पांडुरंग राव टोपे देशस्थ ब्राह्यण थे और अंतिम बाजीराव के पास ब्रह्यवर्त में वे दानाध्यक्ष के पद पर थे। उस ब्रह्यवर्त को एक समय कितना अलभ्य लाभ हुआ था! उसके आंगन में नाना साहब, झाँसी की छबीली, तात्या टोपे आदि की समकालीन स्नेह लीला हुई थी। बचपन से ही श्रीमंत नाना की तात्या से बड़ी प्रीति थी। जिस महान् कार्य