के अनुसार तो कुछ आकस्मिक तेेज से ही गतिमान हो जाते हैं। ब्रह्यवर्त के राजमहल के ध्यान में यह बात तत्काल आ गई और उसने मेरठ के विद्रोह का पूरा लाभ लेने का निश्चय किया। परंतु वह लाभ लेने के लिए तत्काल दिल्ली के पीछे-पीछे विद्रोह करें या जून के पहले हफ्ते में पूर्व संकेतों के अनुसार विद्रोह करें? इन दोनों में से दूसरा ही रास्ता ठीक समझ उसके अनुसार मई के उŸारार्ध में ब्रह्यवर्त के अंतर्बाह्य दांव-घात चलने
के अनुसार तो कुछ आकस्मिक तेेज से ही गतिमान हो जाते हैं। ब्रह्यवर्त के राजमहल के ध्यान में यह बात तत्काल आ गई और उसने मेरठ के विद्रोह का पूरा लाभ लेने का निश्चय किया। परंतु वह लाभ लेने के लिए तत्काल दिल्ली के पीछे-पीछे विद्रोह करें या जून के पहले हफ्ते में पूर्व संकेतों के अनुसार विद्रोह करें? इन दोनों में से दूसरा ही रास्ता ठीक समझ उसके अनुसार मई के उŸारार्ध में ब्रह्यवर्त के अंतर्बाह्य दांव-घात चलने