लगे। ब्रह्यवर्त से कानपुर बिलकुल पास है। इस शहर मंे बहुत दिनों से अंगे्रजी सेना का महŸवपूर्ण शिविर था। सन् 1857 के मई माह मंे वहां पर पहली 53वीं एवं 56वीं पैदल सिपाहियो की पलटन और घुड़सवार सिपाहियों की दूसरी पलटन-ऐसी कोई तीन हजार नेटिव सेना थी। वहां का तोपखाना अंगे्रजों के कब्जें में था और उसपर कोई साठ अंगे्रज और अन्य सौ-सवा सौ सोल्जर-इतने गोरे रहते थे। सारी सेना का कमांडर सर हो व्हीलर था। व्हीलर आयु
लगे। ब्रह्यवर्त से कानपुर बिलकुल पास है। इस शहर मंे बहुत दिनों से अंगे्रजी सेना का महŸवपूर्ण शिविर था। सन् 1857 के मई माह मंे वहां पर पहली 53वीं एवं 56वीं पैदल सिपाहियो की पलटन और घुड़सवार सिपाहियों की दूसरी पलटन-ऐसी कोई तीन हजार नेटिव सेना थी। वहां का तोपखाना अंगे्रजों के कब्जें में था और उसपर कोई साठ अंगे्रज और अन्य सौ-सवा सौ सोल्जर-इतने गोरे रहते थे। सारी सेना का कमांडर सर हो व्हीलर था। व्हीलर आयु