1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

कोटि-कोटी कंठों से गूंज उठा था। आज ही के दिवस मेरठ के सिपाहियों ने भयानक विद्रोह में शामिल होते हुए दिल्ली की ओर कूच किया था और सूर्य के प्रकाश में झिलमिलाते यमुना जल के दर्शन किए थे, और उन ऐतिहासिक पलों को आत्मसात् किया था तथा प्राचीन युग का अवसान कर नए युग का उदय किया था और ‘‘एक ही पल में अपने नेता, अपने घ्वज तथा एक कारण को प्राप्त कर लिया था और सैनिक विद्रोह को एक राष्ट्रीय व धार्मिक संग्राम में परिवर्तित कर दिया था।’’


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कोटि-कोटी कंठों से गूंज उठा था। आज ही के दिवस मेरठ के सिपाहियों ने भयानक विद्रोह में शामिल होते हुए दिल्ली की ओर कूच किया था और सूर्य के प्रकाश में झिलमिलाते यमुना जल के दर्शन किए थे, और उन ऐतिहासिक पलों को आत्मसात् किया था तथा प्राचीन युग का अवसान कर नए युग का उदय किया था और ‘‘एक ही पल में अपने नेता, अपने घ्वज तथा एक कारण को प्राप्त कर लिया था और सैनिक विद्रोह को एक राष्ट्रीय व धार्मिक संग्राम में परिवर्तित कर दिया था।’’


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