1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar



ओ हुतात्माओ! समस्त सम्मान आपको प्राप्त हों, क्यांेकि जाति के संरक्षण व सम्मान के लिए आपने उस समय क्रांति की कठोर अग्निपरीक्षा को सहन किया जब इस पावन भूमि के धर्मों पर बलात् व कुटिलतापूर्ण धर्मांतरण का संकट छा रहा था। जब पाखंडी ने अपने मित्रवत् आवरण को उतार फंेका था और विश्वासघाती शत्रु के घृण्ति रूप में नग्न खड़ा हो गया था तथा संधियों का उल्लघंन करने लगा था, मुकुटों को भंग करने लगा था और हमारी कृपालू


83 of 2102



ओ हुतात्माओ! समस्त सम्मान आपको प्राप्त हों, क्यांेकि जाति के संरक्षण व सम्मान के लिए आपने उस समय क्रांति की कठोर अग्निपरीक्षा को सहन किया जब इस पावन भूमि के धर्मों पर बलात् व कुटिलतापूर्ण धर्मांतरण का संकट छा रहा था। जब पाखंडी ने अपने मित्रवत् आवरण को उतार फंेका था और विश्वासघाती शत्रु के घृण्ति रूप में नग्न खड़ा हो गया था तथा संधियों का उल्लघंन करने लगा था, मुकुटों को भंग करने लगा था और हमारी कृपालू


83 of 2102