1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

और उनके शिक्षकों मंे चलनेवाले संवाद और बाजार व दुकानों-दुकानों में चर्चाओं आदि से लोकक्षोभ की चिनगारियां उड़ने लगी थी। फिरंगियों को मार डालने की बातें लोग राह चलते करने लगे थे और सिपाही अपने स्वदेशी सूबेदार के आदेशों को छोड़ दूसरों के आदेश टालने लगे। बाजार में एक अंगे्रज महिला कुछ वस्तुएं खरीदने हमेशा की ऐंठ में जा रही थी कि कोई राहगीर भौंहें चढ़ाए उसके पास आया और बोला, ‘‘अब यह ऐंठ बहुत हो गई। हिंदुस्थान


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और उनके शिक्षकों मंे चलनेवाले संवाद और बाजार व दुकानों-दुकानों में चर्चाओं आदि से लोकक्षोभ की चिनगारियां उड़ने लगी थी। फिरंगियों को मार डालने की बातें लोग राह चलते करने लगे थे और सिपाही अपने स्वदेशी सूबेदार के आदेशों को छोड़ दूसरों के आदेश टालने लगे। बाजार में एक अंगे्रज महिला कुछ वस्तुएं खरीदने हमेशा की ऐंठ में जा रही थी कि कोई राहगीर भौंहें चढ़ाए उसके पास आया और बोला, ‘‘अब यह ऐंठ बहुत हो गई। हिंदुस्थान


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