ऐसा अंगेजों को लगता था तो कोई एकदम गलता भी नहीं था। क्योंकि आज तक अंगे्रजों को लगता था तो कोई एकदम गलत भी नहीं था। क्योंकि आज तक अंगे्रजों के पैरों तले कुचले, निर्जीव, निरूपद्रवी और नपुंसक केंचुए क्या हिंदुस्थान में कम थे? उन्हीं केंचुओं जैसा केंचुआ नाना भी होगा, इस भ्रम में पड़कर ही सर व्हीलर ने ब्रह्यवर्त की बांबी में बैठे नाग को और चाहिए ही क्या था! उसने दो तोपें, तीन सौ निजी सिपाही, पैदल और घुड़सवारों
ऐसा अंगेजों को लगता था तो कोई एकदम गलता भी नहीं था। क्योंकि आज तक अंगे्रजों को लगता था तो कोई एकदम गलत भी नहीं था। क्योंकि आज तक अंगे्रजों के पैरों तले कुचले, निर्जीव, निरूपद्रवी और नपुंसक केंचुए क्या हिंदुस्थान में कम थे? उन्हीं केंचुओं जैसा केंचुआ नाना भी होगा, इस भ्रम में पड़कर ही सर व्हीलर ने ब्रह्यवर्त की बांबी में बैठे नाग को और चाहिए ही क्या था! उसने दो तोपें, तीन सौ निजी सिपाही, पैदल और घुड़सवारों