1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

प्रचंड बादलों का संकेत उसके जलपृष्ठ पर रŸाी भर दिखना असंभव था। कानपुर की सेना की चचंलता से सर व्हीलर चैंका था, फिर भी उसे इसकी तिल भर शंका नहीं हुई कि ब्रह्यवर्त का राजा अपने विरूद्ध है। जिसके मस्तक का मुकुट अभी क्षण भर पहले पैरों से कुचला है, एक क्षण पहले ही जिस नाना की पूछ को जान-बुझकर मसला है, उसी नाना को अंगे्रजों ने अपनी सुरक्षा की विनती कर कानपुर बुलाया। नाना सहनशील हिंदू है, वह मन में द्वेष पालनेवाला जहरीला नाग नहीं,


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प्रचंड बादलों का संकेत उसके जलपृष्ठ पर रŸाी भर दिखना असंभव था। कानपुर की सेना की चचंलता से सर व्हीलर चैंका था, फिर भी उसे इसकी तिल भर शंका नहीं हुई कि ब्रह्यवर्त का राजा अपने विरूद्ध है। जिसके मस्तक का मुकुट अभी क्षण भर पहले पैरों से कुचला है, एक क्षण पहले ही जिस नाना की पूछ को जान-बुझकर मसला है, उसी नाना को अंगे्रजों ने अपनी सुरक्षा की विनती कर कानपुर बुलाया। नाना सहनशील हिंदू है, वह मन में द्वेष पालनेवाला जहरीला नाग नहीं,


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