1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

काशी में पकड़े गए पत्र में एक नेता की ओर से इतने ही हस्ताक्षर थे। इस क्रांति रचना के अनुरूप ऐसा ही व्यवहार उसके उŸारदायी नेताओं की ओर से रखा गया था। दिल्ली के बादशाह, झाँसी की रानी या नाना साहब की योजना के बारे में विद्रोह होने के पहले दिन तक अंग्रजों को तिनके के बराबर भी भनक नहीं मिली। परंतु इस सब में ब्रह्यवर्त के बाड़े की विशेष करामात! इतिहासकार ‘के’ कहता है-‘‘मराठा राज्य-संस्थापक शिवाजी के चरित्र का अध्ययन नाना ने यों ही नहीं किया था।


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काशी में पकड़े गए पत्र में एक नेता की ओर से इतने ही हस्ताक्षर थे। इस क्रांति रचना के अनुरूप ऐसा ही व्यवहार उसके उŸारदायी नेताओं की ओर से रखा गया था। दिल्ली के बादशाह, झाँसी की रानी या नाना साहब की योजना के बारे में विद्रोह होने के पहले दिन तक अंग्रजों को तिनके के बराबर भी भनक नहीं मिली। परंतु इस सब में ब्रह्यवर्त के बाड़े की विशेष करामात! इतिहासकार ‘के’ कहता है-‘‘मराठा राज्य-संस्थापक शिवाजी के चरित्र का अध्ययन नाना ने यों ही नहीं किया था।


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