सारी सभा पर उनका प्रभाव था और इस सभा के निर्णयों के अनुसार सेना एकमत से व्यवहार करे, यह निश्चित था। इस कारण सूबेदार टीका सिंह का जो मत होता वही सारी सेना का होता था। ऐसे नेता और नाना की भेंट होना, आमने-सामने
1857 का स्वातंत्र्य समर - 181
सारी बातें होना अति आवश्यक था। उसमें भी मेरठ के आकस्मिक विद्रोह से अस्त-व्यस्त हुए कार्यक्रम को फिर से एक बार सही करना अनिवार्य था, इसलिए नाना की और सूबेदार टीका
सारी सभा पर उनका प्रभाव था और इस सभा के निर्णयों के अनुसार सेना एकमत से व्यवहार करे, यह निश्चित था। इस कारण सूबेदार टीका सिंह का जो मत होता वही सारी सेना का होता था। ऐसे नेता और नाना की भेंट होना, आमने-सामने
1857 का स्वातंत्र्य समर - 181
सारी बातें होना अति आवश्यक था। उसमें भी मेरठ के आकस्मिक विद्रोह से अस्त-व्यस्त हुए कार्यक्रम को फिर से एक बार सही करना अनिवार्य था, इसलिए नाना की और सूबेदार टीका