सिंह की भेंट निश्चित हुई। पहली भेंट में सूबेदार और नाना की मंत्रणा बहुत देर तक हुई। ‘‘सेना के हिंदू और मुसलमान-ये दोनों ही स्वराज्य और स्वधर्म के लिए एकमत से विद्रोह करने को सज्जित हो गए हैं और हमव ह करने के लिए तैयार हैं।’’ सूबेदार के ऐसा विश्वास दिलाने पर अन्य फुटकर बातें निश्चित करने को दूसरी अधिक सावधान और सावकाश भेंट की बात निश्चित कर सूबेदार वापस लौटे। जून की पहली तारीख को संध्या समय श्रीमंत
सिंह की भेंट निश्चित हुई। पहली भेंट में सूबेदार और नाना की मंत्रणा बहुत देर तक हुई। ‘‘सेना के हिंदू और मुसलमान-ये दोनों ही स्वराज्य और स्वधर्म के लिए एकमत से विद्रोह करने को सज्जित हो गए हैं और हमव ह करने के लिए तैयार हैं।’’ सूबेदार के ऐसा विश्वास दिलाने पर अन्य फुटकर बातें निश्चित करने को दूसरी अधिक सावधान और सावकाश भेंट की बात निश्चित कर सूबेदार वापस लौटे। जून की पहली तारीख को संध्या समय श्रीमंत