क्रांति पक्ष की योजनाएं इधर इस ऊंचाई तक पहंुच रही थी और उधर अंगे्रज लोगों को हर नए पल इतनी घबराहट हो रही थी कि क्या पूछने? लखनऊ से सहायता आने और श्रीमंत नाना साहब की सुरक्षा में खजाना एवं गोला-बारूद पहुंच जाने के बाद सर व्हीलर के मन को थोड़ा धीरज बंधा था। पर अंगे्रज बस्ती को बिल्कुल धीरज नहीं था। 24 मई को मुसलमानों की ईद थी। उस दिन सब ओर विद्रोह होगा-ऐसा डर हर शहरी अंगे्रज को था। परंतु ऐसे सहज ध्यान में आ जानेवाले दिन सार्वजनिक विद्रोह होगा,
क्रांति पक्ष की योजनाएं इधर इस ऊंचाई तक पहंुच रही थी और उधर अंगे्रज लोगों को हर नए पल इतनी घबराहट हो रही थी कि क्या पूछने? लखनऊ से सहायता आने और श्रीमंत नाना साहब की सुरक्षा में खजाना एवं गोला-बारूद पहुंच जाने के बाद सर व्हीलर के मन को थोड़ा धीरज बंधा था। पर अंगे्रज बस्ती को बिल्कुल धीरज नहीं था। 24 मई को मुसलमानों की ईद थी। उस दिन सब ओर विद्रोह होगा-ऐसा डर हर शहरी अंगे्रज को था। परंतु ऐसे सहज ध्यान में आ जानेवाले दिन सार्वजनिक विद्रोह होगा,