ऐसा सहज में लग सकता है उस दिन शांति बनाए रखना और जिस दिन विद्रोह होने की बिल्कुल भी संभावना न हो उस दिन उछल पड़ना-ये दांव-घात ही तो विद्रोह की सफलता के मुख्य कारण थे, इसीलिए कानपुर में ईद के महोत्सव में किंचित् भी गड़बड़ी नहीं होने दी गई। उस दिन सुबह आंगे्रज इतना घबराया हुआ था
1857 का स्वातंत्र्य समर - 182
कि सर व्हीलर ने लखनऊ को तार भेजा-‘‘आज विद्रोह किसी भी तरह नहीं रूक सकता। परंतु इस महोत्सव के
ऐसा सहज में लग सकता है उस दिन शांति बनाए रखना और जिस दिन विद्रोह होने की बिल्कुल भी संभावना न हो उस दिन उछल पड़ना-ये दांव-घात ही तो विद्रोह की सफलता के मुख्य कारण थे, इसीलिए कानपुर में ईद के महोत्सव में किंचित् भी गड़बड़ी नहीं होने दी गई। उस दिन सुबह आंगे्रज इतना घबराया हुआ था
1857 का स्वातंत्र्य समर - 182
कि सर व्हीलर ने लखनऊ को तार भेजा-‘‘आज विद्रोह किसी भी तरह नहीं रूक सकता। परंतु इस महोत्सव के