1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

ऐसा सहज में लग सकता है उस दिन शांति बनाए रखना और जिस दिन विद्रोह होने की बिल्कुल भी संभावना न हो उस दिन उछल पड़ना-ये दांव-घात ही तो विद्रोह की सफलता के मुख्य कारण थे, इसीलिए कानपुर में ईद के महोत्सव में किंचित् भी गड़बड़ी नहीं होने दी गई। उस दिन सुबह आंगे्रज इतना घबराया हुआ था


1857 का स्वातंत्र्य समर - 182

कि सर व्हीलर ने लखनऊ को तार भेजा-‘‘आज विद्रोह किसी भी तरह नहीं रूक सकता। परंतु इस महोत्सव के


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ऐसा सहज में लग सकता है उस दिन शांति बनाए रखना और जिस दिन विद्रोह होने की बिल्कुल भी संभावना न हो उस दिन उछल पड़ना-ये दांव-घात ही तो विद्रोह की सफलता के मुख्य कारण थे, इसीलिए कानपुर में ईद के महोत्सव में किंचित् भी गड़बड़ी नहीं होने दी गई। उस दिन सुबह आंगे्रज इतना घबराया हुआ था


1857 का स्वातंत्र्य समर - 182

कि सर व्हीलर ने लखनऊ को तार भेजा-‘‘आज विद्रोह किसी भी तरह नहीं रूक सकता। परंतु इस महोत्सव के


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