‘‘सच में अभी मुझे ठीक के सूझता नहीं है।’’ आंखें मटकाते उस चतुर अजीमुल्ला खाने ने कहा, ‘‘रख लीजिए-‘निराशा का किला’।’’
मई के अंत में एक दिन एक शरारती तरूण अंगे्रज ने शराब के नशे में एक सिपाही पर गोली चला दी। यह गोली चूक गई और उस सिपाही ने सोल्जर को निरपराध मान छोड़ दिया गया और कहा गया कि शराब के नशे में बंदूक गलती से चल गई।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 183
यह हमेशा का निर्णय था, पर अब स्थिति हमेशा
‘‘सच में अभी मुझे ठीक के सूझता नहीं है।’’ आंखें मटकाते उस चतुर अजीमुल्ला खाने ने कहा, ‘‘रख लीजिए-‘निराशा का किला’।’’
मई के अंत में एक दिन एक शरारती तरूण अंगे्रज ने शराब के नशे में एक सिपाही पर गोली चला दी। यह गोली चूक गई और उस सिपाही ने सोल्जर को निरपराध मान छोड़ दिया गया और कहा गया कि शराब के नशे में बंदूक गलती से चल गई।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 183
यह हमेशा का निर्णय था, पर अब स्थिति हमेशा