1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

समाचार अंग्रेजों और उनकी सहायता करनेवाले नानकचंद जैसे कुल्हाड़ी के बेंटे से भी इतनी मुहरबंद रहे-यह कितना बड़ा आश्चर्य था!

यह मुहर 4 जून की रात को टूटी। सार्वजनिक कार्यक्रम के अनुरूप रात के अंधेरे में कुछ बंदूकें चलीं और निश्चित भवनों को आग लगी। रक्तपात, नाश और मुत्यु की दौड़ शुरू हो जाने की वह करतल ध्वनि थी। सबसे पहले टीका सिंह का घोड़ा कर्कश रीति से हिनहिनाया और उसी के साथ हजारों घोड़ें एक क्षण् में


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समाचार अंग्रेजों और उनकी सहायता करनेवाले नानकचंद जैसे कुल्हाड़ी के बेंटे से भी इतनी मुहरबंद रहे-यह कितना बड़ा आश्चर्य था!

यह मुहर 4 जून की रात को टूटी। सार्वजनिक कार्यक्रम के अनुरूप रात के अंधेरे में कुछ बंदूकें चलीं और निश्चित भवनों को आग लगी। रक्तपात, नाश और मुत्यु की दौड़ शुरू हो जाने की वह करतल ध्वनि थी। सबसे पहले टीका सिंह का घोड़ा कर्कश रीति से हिनहिनाया और उसी के साथ हजारों घोड़ें एक क्षण् में


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