1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

के सूबेदार को सूबेदार टीका सिंह का सलाम है और वह पूछता है, घुड़सवार फिरंगियों के विरूद्ध चल पड़े हैं फिर पैदल को देर क्यों?’’ दो घुड़सवारों के यह सुनाते ही पहली पैदल रेजिमेंट ‘दीन और देश’ कहते बाहर निकली। यह देखते ही उसका अधिकारी कर्नल एवर्ट कहने लगा-‘‘हां-हां, मेरे प्रिय बच्चों, (बाबा लोगों) यह क्या? यह तुम्हारे राजनिष्ठ शील को शोभा नहीं देता। ठहरो बच्चों, ठहरो!! कहां का ठहरो और क्या! कुछ ही देर में


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के सूबेदार को सूबेदार टीका सिंह का सलाम है और वह पूछता है, घुड़सवार फिरंगियों के विरूद्ध चल पड़े हैं फिर पैदल को देर क्यों?’’ दो घुड़सवारों के यह सुनाते ही पहली पैदल रेजिमेंट ‘दीन और देश’ कहते बाहर निकली। यह देखते ही उसका अधिकारी कर्नल एवर्ट कहने लगा-‘‘हां-हां, मेरे प्रिय बच्चों, (बाबा लोगों) यह क्या? यह तुम्हारे राजनिष्ठ शील को शोभा नहीं देता। ठहरो बच्चों, ठहरो!! कहां का ठहरो और क्या! कुछ ही देर में


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