में सिरमौर नेताओं की कोई कमी नहीं थी। वहां श्रीमंत नाना साहब थे, वहां श्री बाबा साहब, बाला साहब और राव साहब पेशवा थे। वहां तात्या टोपे थे। वहां अजीमुल्ला खान थे। इतनी अलग-अलग शक्तियां सौभाग्य से एक स्थान पर होने पर सिपाहियों को नेताओं की खोज में दिल्ली की ओर जाने का कोई कारण नहीं था।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 185
विद्रोह की शुरूआत में ही सारी सेना दिल्ली में ही जमा हो जाए तो वास्तविक कार्यक्रम
में सिरमौर नेताओं की कोई कमी नहीं थी। वहां श्रीमंत नाना साहब थे, वहां श्री बाबा साहब, बाला साहब और राव साहब पेशवा थे। वहां तात्या टोपे थे। वहां अजीमुल्ला खान थे। इतनी अलग-अलग शक्तियां सौभाग्य से एक स्थान पर होने पर सिपाहियों को नेताओं की खोज में दिल्ली की ओर जाने का कोई कारण नहीं था।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 185
विद्रोह की शुरूआत में ही सारी सेना दिल्ली में ही जमा हो जाए तो वास्तविक कार्यक्रम