सिद्ध नहीं होना था। स्थान-स्थान पर अंगे्रजी की खिंचाई करने में ही भला था। उसमें भी कानपुर, पंजाब, कलकŸाा और दिल्ली प्रांत के बीच की कड़ी होने से उसपर आघात कर अंगे्रजी यातायात को तोड़ना अति आवश्यक था। ये सारी बातें सिपाहियों को उनके सूबेदारों एवं नाना के मंत्रियों के समझाने पर कानपुर की ओर ही वापस लौटने की योजना सर्वसम्मति से बनी। उन तीन हजार सिपाहियों ने श्रीमंत नाना साहब को अपना राजा चुना और उनके प्रत्यक्ष
सिद्ध नहीं होना था। स्थान-स्थान पर अंगे्रजी की खिंचाई करने में ही भला था। उसमें भी कानपुर, पंजाब, कलकŸाा और दिल्ली प्रांत के बीच की कड़ी होने से उसपर आघात कर अंगे्रजी यातायात को तोड़ना अति आवश्यक था। ये सारी बातें सिपाहियों को उनके सूबेदारों एवं नाना के मंत्रियों के समझाने पर कानपुर की ओर ही वापस लौटने की योजना सर्वसम्मति से बनी। उन तीन हजार सिपाहियों ने श्रीमंत नाना साहब को अपना राजा चुना और उनके प्रत्यक्ष