1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

दर्शन की तीव्र इच्छा प्रदर्शित की। श्रीमंत नाना साहब को देखते ही उनके नाम से सब ओर जयघोष होने लगा और उन सभी ने उस स्वयं वृण्ीत महाराजा के भक्तिभाव से मुजरे किए। श्रेष्ठ का चयन होते ही नाना की सहमति से अपने लश्करी अधिकारी चुनने का काम शुरू हुआ।

लश्कर के सारे नए नियम प्रचारित किए गए। कानपुर के क्रांति केंद्र के प्राण सूबेदार टीका सिंह को उसके जनरल का पद दिया गया। वैसे ही जमादार दलगंजन सिंह को 53वीं


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दर्शन की तीव्र इच्छा प्रदर्शित की। श्रीमंत नाना साहब को देखते ही उनके नाम से सब ओर जयघोष होने लगा और उन सभी ने उस स्वयं वृण्ीत महाराजा के भक्तिभाव से मुजरे किए। श्रेष्ठ का चयन होते ही नाना की सहमति से अपने लश्करी अधिकारी चुनने का काम शुरू हुआ।

लश्कर के सारे नए नियम प्रचारित किए गए। कानपुर के क्रांति केंद्र के प्राण सूबेदार टीका सिंह को उसके जनरल का पद दिया गया। वैसे ही जमादार दलगंजन सिंह को 53वीं


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