1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar



आक्रमण के दो दिन बाद ही अंगे्रजों को पानी की कमी पड़ने लगी। उस चारदीवारी के अंदर एक कुआं उपयोग में लाने लायक था। पर विद्रोहियों की उस कुएं पर अंगे्रजी सोल्जर से अधिक आंख थी। धूप और गरमी की तपन भी इतनी प्रखर थी कि सोल्जर खड़े-खड़े लू के कारण ही मर जाते। सबके हृदय पत्थर की तरह कड़े हो गए। स्त्री-पुरूषों के बीच का सर्व भेदाभेद और जन लज्जा छूट गई। मरे हुओं को गाड़ने की बात तो छोड़ो, कौन मरा या कौन जीवित है,


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आक्रमण के दो दिन बाद ही अंगे्रजों को पानी की कमी पड़ने लगी। उस चारदीवारी के अंदर एक कुआं उपयोग में लाने लायक था। पर विद्रोहियों की उस कुएं पर अंगे्रजी सोल्जर से अधिक आंख थी। धूप और गरमी की तपन भी इतनी प्रखर थी कि सोल्जर खड़े-खड़े लू के कारण ही मर जाते। सबके हृदय पत्थर की तरह कड़े हो गए। स्त्री-पुरूषों के बीच का सर्व भेदाभेद और जन लज्जा छूट गई। मरे हुओं को गाड़ने की बात तो छोड़ो, कौन मरा या कौन जीवित है,


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