इसकी भी खबर रखना कठिन हो गया; क्योंकि जीवित लोगों की सूची में नाम लिखते-लिखते उसे काटने की बारी आ जाती। ऐसे अवसर का यथार्थ वर्णन करने का एक ही उपाय था और वह था एक घंटे की अवधि
1857 का स्वातंत्र्य समर - 187
का चित्र जैसा है बनाना-कैप्टन थाॅमस स्वयं के अनुभव लिखता है-‘‘आर्मस्ट्रांग घायल होकर गिरा, उसका हाल देखने लेफ्टिनंेट प्रोल वहां गया। वह दो-चार संतोष की बात कहे इतने में सामने से आती बंदूक की
इसकी भी खबर रखना कठिन हो गया; क्योंकि जीवित लोगों की सूची में नाम लिखते-लिखते उसे काटने की बारी आ जाती। ऐसे अवसर का यथार्थ वर्णन करने का एक ही उपाय था और वह था एक घंटे की अवधि
1857 का स्वातंत्र्य समर - 187
का चित्र जैसा है बनाना-कैप्टन थाॅमस स्वयं के अनुभव लिखता है-‘‘आर्मस्ट्रांग घायल होकर गिरा, उसका हाल देखने लेफ्टिनंेट प्रोल वहां गया। वह दो-चार संतोष की बात कहे इतने में सामने से आती बंदूक की