1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

पर पड़ा और उसकी चटनी बना गया। दो-चार दिन बाद वही दीवार जिससे टिककर वह नूतन विधवा खड़ी थी, गिर जाने से वह भी उसके नीचे अपने पति की देह जैसी चटनी हो मर गई। चारदीवारी के पास की खंदक में सात गोरी महिलाएं बैठी थीं। एक बम ऊपर से गिरा और उसमें सातों मर गई। इतना ही नहीं, जिसने विद्रोह के पहले सिपाही पर अकारण गोली चलाई थी और जो छूट गया था वह गोरा सोल्जर भी मर गया। अर्थात् सिपाहियों की बंदूकें भी गलती से चल ही


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पर पड़ा और उसकी चटनी बना गया। दो-चार दिन बाद वही दीवार जिससे टिककर वह नूतन विधवा खड़ी थी, गिर जाने से वह भी उसके नीचे अपने पति की देह जैसी चटनी हो मर गई। चारदीवारी के पास की खंदक में सात गोरी महिलाएं बैठी थीं। एक बम ऊपर से गिरा और उसमें सातों मर गई। इतना ही नहीं, जिसने विद्रोह के पहले सिपाही पर अकारण गोली चलाई थी और जो छूट गया था वह गोरा सोल्जर भी मर गया। अर्थात् सिपाहियों की बंदूकें भी गलती से चल ही


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