गई। और जब चल गई तब ऐसी चलीं कि फिर यावच्चंद्र दिवाकरौ, उनके वह भयानक आघात दारू के नशे में भी अंगे्रज लोग भूलेंगे नहीं!
इस भयंकर घेरे में अंगे्रजों से ईमानदारी बनाए रखना जिन्हंे अपना कर्तव्य लगता था, ऐसे कितने ही नेटिव उस चारदीवारी के केवल राजनिष्ठा से मृत्यु दाढ़ों में हाथ डाले खड़े थे। अंगे्रजों के एक बच्चे को दूध पिलाती एक नेटिव दाई के दोनों हाथ गोले ने उड़ा दिए। अपने मालिक को गरमागरम खाना मिले, इसके
गई। और जब चल गई तब ऐसी चलीं कि फिर यावच्चंद्र दिवाकरौ, उनके वह भयानक आघात दारू के नशे में भी अंगे्रज लोग भूलेंगे नहीं!
इस भयंकर घेरे में अंगे्रजों से ईमानदारी बनाए रखना जिन्हंे अपना कर्तव्य लगता था, ऐसे कितने ही नेटिव उस चारदीवारी के केवल राजनिष्ठा से मृत्यु दाढ़ों में हाथ डाले खड़े थे। अंगे्रजों के एक बच्चे को दूध पिलाती एक नेटिव दाई के दोनों हाथ गोले ने उड़ा दिए। अपने मालिक को गरमागरम खाना मिले, इसके