से गल गए। और इस अनर्थ से भी भयंकर अनर्थ करने के लिए अब अकाल का तांडव शुरू हुआ। कहर ऐसा हुआ मानो सौ साल किए अन्याय का खरा प्रतिशोध कानपुर की चारदीवारी के अंदर
1857 का स्वातंत्र्य समर - 188
काल की दाढ़ बनकर सबको चबाता इक्कीस दिनों तक तांडव करता रहा।
अंगे्रजों की चारदीवारी के अंदर ऐसा कहर हो रहा था, तभी चारदीवारी के बाहर रखी गई उनकी तोपों ने अच्छी लड़ाई चला रखी थी। तोपखाने के प्रमुख अधिकारी अॅशे,
से गल गए। और इस अनर्थ से भी भयंकर अनर्थ करने के लिए अब अकाल का तांडव शुरू हुआ। कहर ऐसा हुआ मानो सौ साल किए अन्याय का खरा प्रतिशोध कानपुर की चारदीवारी के अंदर
1857 का स्वातंत्र्य समर - 188
काल की दाढ़ बनकर सबको चबाता इक्कीस दिनों तक तांडव करता रहा।
अंगे्रजों की चारदीवारी के अंदर ऐसा कहर हो रहा था, तभी चारदीवारी के बाहर रखी गई उनकी तोपों ने अच्छी लड़ाई चला रखी थी। तोपखाने के प्रमुख अधिकारी अॅशे,