लिए गोलियों की बरसात में भी नेटिव बटलर यहां से वहां दौड़ते मरते जा रहे थे। अंगे्रजों को पानी पिलाते नेटिव भिश्ती अपने प्राण दांव पर लगाए थे। पानी इतना कम था कि अच्चे चमड़ा ही चबाते रहते थे। हैजा, बीमारी और त्रिदोष ने भी अंगे्रजों से प्रतिशोध लेने में कमी नहीं की। सर जाॅर्ज पार्कर, कर्नल विलियम, लेफ्टिनेंट रूनी एक के बाद दूसरा सड़कर-सड़कर मर गए। जो बीमारी या गोली से नहीं मरे वे इस जीवित श्मशान की भयानकता
लिए गोलियों की बरसात में भी नेटिव बटलर यहां से वहां दौड़ते मरते जा रहे थे। अंगे्रजों को पानी पिलाते नेटिव भिश्ती अपने प्राण दांव पर लगाए थे। पानी इतना कम था कि अच्चे चमड़ा ही चबाते रहते थे। हैजा, बीमारी और त्रिदोष ने भी अंगे्रजों से प्रतिशोध लेने में कमी नहीं की। सर जाॅर्ज पार्कर, कर्नल विलियम, लेफ्टिनेंट रूनी एक के बाद दूसरा सड़कर-सड़कर मर गए। जो बीमारी या गोली से नहीं मरे वे इस जीवित श्मशान की भयानकता