1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

हिंदुस्तान की सौगंध, नहीं। भारतीय राष्ट्र की ऐतिहासिक निरंतरता भंग नहीं हुई है। 10 मई, 1857 को समाप्त नहीं हो गया और न ही यह तब तक समाप्त होगा जब तक कि ऐसी कोई 10 मई नहीं आती है, जो हमारे संकल्प के साकार होने की साक्षी हो; जो हमारे सुंदर भारत के शीर्ष पर विजय का जगमगाता मुकुट अथवा


24

बलिदान की आभा को देख ले।

किंतु हे गरिमामय हुतात्माओ! अपने पुत्रों के इस पावन संग्राम में सहायता करो। अपनी प्रेरक


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हिंदुस्तान की सौगंध, नहीं। भारतीय राष्ट्र की ऐतिहासिक निरंतरता भंग नहीं हुई है। 10 मई, 1857 को समाप्त नहीं हो गया और न ही यह तब तक समाप्त होगा जब तक कि ऐसी कोई 10 मई नहीं आती है, जो हमारे संकल्प के साकार होने की साक्षी हो; जो हमारे सुंदर भारत के शीर्ष पर विजय का जगमगाता मुकुट अथवा


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बलिदान की आभा को देख ले।

किंतु हे गरिमामय हुतात्माओ! अपने पुत्रों के इस पावन संग्राम में सहायता करो। अपनी प्रेरक


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