1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

में आ जाएगा। एक नेटिव ईसाई कहता है-‘‘मुसलमान क रूप धरकर एक ऊंचाई पर मैं बैठा था, तब देखा-लड़ते वीरों को पानी पहुंचानें के लिए भाग-दौड़ कर रहे हैं। इतने में एक मेरे पास आया और बोला-उधर अपने देशबंधु लड़ रहे हैं। इतनें में एक मेरे पास आया और बोला-उधर अपने देशबंधु लड़ रहे हैं और तेरे तरूण मुसलमान यहां मक्खियां मारते बैठे, यह लज्जाजनक है। चल उधर, तोपखाने पर स्वयं सेवा करने।


1857 का स्वातंत्र्य समर - 190


890 of 2102

में आ जाएगा। एक नेटिव ईसाई कहता है-‘‘मुसलमान क रूप धरकर एक ऊंचाई पर मैं बैठा था, तब देखा-लड़ते वीरों को पानी पहुंचानें के लिए भाग-दौड़ कर रहे हैं। इतने में एक मेरे पास आया और बोला-उधर अपने देशबंधु लड़ रहे हैं। इतनें में एक मेरे पास आया और बोला-उधर अपने देशबंधु लड़ रहे हैं और तेरे तरूण मुसलमान यहां मक्खियां मारते बैठे, यह लज्जाजनक है। चल उधर, तोपखाने पर स्वयं सेवा करने।


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