1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar



उसने मुझे यह भी कहा कि करीम अली नाम के काने पेंशनर सूबेदार के युवा लड़के ने आज बड़ा पराक्रम किया। उसने खोजकर अंगे्रजों के भवनों को आग लगा दी। उसके इस शोर्य के लिए उसे नब्बे रूपए और एक दुशाला इनाम दिया गया।’’

स्वदेश के लिए लड़ना छोड़ बैठकर मक्खियां मारना, यह केवल तरूणों के लिए ही अति लज्जाजनक माना जा रहा था, ऐसा नहीं, क्योंकि कानपुर की महिलाओं ने अपना जनाना स्वरूप छोड़ समर भूमि में प्रवेश किया था। परंतु


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उसने मुझे यह भी कहा कि करीम अली नाम के काने पेंशनर सूबेदार के युवा लड़के ने आज बड़ा पराक्रम किया। उसने खोजकर अंगे्रजों के भवनों को आग लगा दी। उसके इस शोर्य के लिए उसे नब्बे रूपए और एक दुशाला इनाम दिया गया।’’

स्वदेश के लिए लड़ना छोड़ बैठकर मक्खियां मारना, यह केवल तरूणों के लिए ही अति लज्जाजनक माना जा रहा था, ऐसा नहीं, क्योंकि कानपुर की महिलाओं ने अपना जनाना स्वरूप छोड़ समर भूमि में प्रवेश किया था। परंतु


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