दमक रही थी। कभी-कभी थके और घायल सिपाहियों को वह मिठाई बांटती रास्ते में खड़ी रहती।’’
इधर ऐसी लड़ाई चल रही थी, उधर श्रीमंत नाना राज्य व्यवस्था की रचना करने में यथासंभव जुटे थे। राज्य क्रांति जैसे अशाश्वत और अद्भूत अवसर पर व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखना बहुत कठिन होते हुए भी नाना ने प्रथमतः शहर के लोगों का यथान्याय संरक्षण देने के लिए राज्य व्यवस्था करना प्रारंभ किया। कानपुर शहर के प्रमुख नागरिकों को
दमक रही थी। कभी-कभी थके और घायल सिपाहियों को वह मिठाई बांटती रास्ते में खड़ी रहती।’’
इधर ऐसी लड़ाई चल रही थी, उधर श्रीमंत नाना राज्य व्यवस्था की रचना करने में यथासंभव जुटे थे। राज्य क्रांति जैसे अशाश्वत और अद्भूत अवसर पर व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखना बहुत कठिन होते हुए भी नाना ने प्रथमतः शहर के लोगों का यथान्याय संरक्षण देने के लिए राज्य व्यवस्था करना प्रारंभ किया। कानपुर शहर के प्रमुख नागरिकों को