ज्वाला प्रसाद ने अपने दो अनुचरों के साथ उस चारदीवारी में अपना शिविर बनाया। उस रात कानपुर के मजिस्टेªट होला सिंह और तात्या टोपे ने मल्लाहों को पैसा देकर लगभग चालीस नौकाएं तैयार की। उनका निरीक्षण करने हाथी पर बैठकर आए अधिकारियों ने शिकायत की, इसलिए सौ मजदूर तुरंत लगाकर नौकाओं पर आच्छादन और बैठने के लिए बांस के फर्श बनाए गए। अनाज और अन्य आवश्यक सामग्री भी उस पर चढ़ा दी गई।
परंतु इधर जब अंगे्रजों की जाने
ज्वाला प्रसाद ने अपने दो अनुचरों के साथ उस चारदीवारी में अपना शिविर बनाया। उस रात कानपुर के मजिस्टेªट होला सिंह और तात्या टोपे ने मल्लाहों को पैसा देकर लगभग चालीस नौकाएं तैयार की। उनका निरीक्षण करने हाथी पर बैठकर आए अधिकारियों ने शिकायत की, इसलिए सौ मजदूर तुरंत लगाकर नौकाओं पर आच्छादन और बैठने के लिए बांस के फर्श बनाए गए। अनाज और अन्य आवश्यक सामग्री भी उस पर चढ़ा दी गई।
परंतु इधर जब अंगे्रजों की जाने