1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

या प्रातः निकलें इस संबंध में थोड़ी बातचीत होकर यह तय हुआ कि उस रात सारा कब्जा नाना के हाथ मंे दिया जाए और अंग्रेज दूसरे दिन भोर में निकलने की तैयारी करें। इस तरह दोनों पक्षों के मध्य निश्चित संधिपत्र को लेकर मि. टाॅड (नाना के महल का अंगे्रजी वाचक) श्रीमंत के पास आया। उसे नाना ने बहुत आदर से बैठाया और कुशल-क्षेम की पूछताछ की। उसी रात अंगे्रजों ने अपने शस्त्र नीचे रखे, तोपें नाना को सौंप दी गई और ब्रिगेडियर


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या प्रातः निकलें इस संबंध में थोड़ी बातचीत होकर यह तय हुआ कि उस रात सारा कब्जा नाना के हाथ मंे दिया जाए और अंग्रेज दूसरे दिन भोर में निकलने की तैयारी करें। इस तरह दोनों पक्षों के मध्य निश्चित संधिपत्र को लेकर मि. टाॅड (नाना के महल का अंगे्रजी वाचक) श्रीमंत के पास आया। उसे नाना ने बहुत आदर से बैठाया और कुशल-क्षेम की पूछताछ की। उसी रात अंगे्रजों ने अपने शस्त्र नीचे रखे, तोपें नाना को सौंप दी गई और ब्रिगेडियर


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