मांस बीच-बीच में दिया जाता था। किसी भी तरह के कष्टकारी श्रम का काम बलपूर्वक कैदियों पर नहीं लादा जाता। बच्चों को दूध मिलता था। उनकी निगरानी के लिए बेगम नाम की एक महिला नियुक्त थी। कैद में हैजा और पेचिश शुरू हो जाने पर कैदियों को शुद्ध हवा मिले, इसलिए रोज तीन समय खुले में लाया जाता। फिर भी फिरंगियों के प्रति लोगों में कैसा भयंकर क्षोभ था यह दरशाने के लिए यहां एक कहानी प्रस्तुत कर रहा हूं। कैदखाने
मांस बीच-बीच में दिया जाता था। किसी भी तरह के कष्टकारी श्रम का काम बलपूर्वक कैदियों पर नहीं लादा जाता। बच्चों को दूध मिलता था। उनकी निगरानी के लिए बेगम नाम की एक महिला नियुक्त थी। कैद में हैजा और पेचिश शुरू हो जाने पर कैदियों को शुद्ध हवा मिले, इसलिए रोज तीन समय खुले में लाया जाता। फिर भी फिरंगियों के प्रति लोगों में कैसा भयंकर क्षोभ था यह दरशाने के लिए यहां एक कहानी प्रस्तुत कर रहा हूं। कैदखाने