से यह स्पष्ट दिखने लगा कि रानी के किसी ब्राह्यण नौकर लक्ष्मणराव ने 12वीं रेजिमेंट से संपर्क साधा हुआ है और सिपाही विद्रोह कर अपने अधिकारियों को गारद करें, इसके लिए उसके लगातार प्रयास चल रहे हैं। यह ब्राह्यण-लक्ष्मणराव पांडे-बाद में स्वतंत्र झांसी का दीवान बना। झांसी के धनवान ठाकुर लोगों में एक तरह की खलबली मची है और वे अंगे्रजी राज उलटने की चर्चा कर रहे हैं-पर यह बात कोई बहुत महŸव की नहीं है, क्यांेकि
से यह स्पष्ट दिखने लगा कि रानी के किसी ब्राह्यण नौकर लक्ष्मणराव ने 12वीं रेजिमेंट से संपर्क साधा हुआ है और सिपाही विद्रोह कर अपने अधिकारियों को गारद करें, इसके लिए उसके लगातार प्रयास चल रहे हैं। यह ब्राह्यण-लक्ष्मणराव पांडे-बाद में स्वतंत्र झांसी का दीवान बना। झांसी के धनवान ठाकुर लोगों में एक तरह की खलबली मची है और वे अंगे्रजी राज उलटने की चर्चा कर रहे हैं-पर यह बात कोई बहुत महŸव की नहीं है, क्यांेकि