1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

क्रांति ने घंटानाद कर दिया था और मंदिरों तथा मस्जिदों में एक ही घोष गूंज रहा था-मारो फिरंगी को!’ मेरठ जागा, दिल्ली जागी; बनारस, आगरा, पटना, लखनऊ, इलाहाबाद, जगदलपुर, झांसी, बांदा, इंदौर-सभी नगर जाग उठे-पेशावर से कलकत्ता और नर्मदा से हिमालय तक यह ज्वालामुखी के एक धधकते लावा के रूप में फूट पड़ा।

तत्पश्चात्, ओ हुतात्माओ! हमें उन छोटी-बड़ी त्रुटियों के बारे में बताओ जो आपको इस महान् परीक्षण के दौरान हमारे सेनानियों में मिली। परंतु सर्वोंपरि,


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क्रांति ने घंटानाद कर दिया था और मंदिरों तथा मस्जिदों में एक ही घोष गूंज रहा था-मारो फिरंगी को!’ मेरठ जागा, दिल्ली जागी; बनारस, आगरा, पटना, लखनऊ, इलाहाबाद, जगदलपुर, झांसी, बांदा, इंदौर-सभी नगर जाग उठे-पेशावर से कलकत्ता और नर्मदा से हिमालय तक यह ज्वालामुखी के एक धधकते लावा के रूप में फूट पड़ा।

तत्पश्चात्, ओ हुतात्माओ! हमें उन छोटी-बड़ी त्रुटियों के बारे में बताओ जो आपको इस महान् परीक्षण के दौरान हमारे सेनानियों में मिली। परंतु सर्वोंपरि,


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